बस्ती तेरी यही कहानी कूड़ा कचरा और गंदा पानी 

किसी भी बस्ती, या कालोनी में सफाई, पानी, खराब सड़क,के लिए जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारीयो,पर दोषारोपण करना कहाँतक उचित है। किसी भी स्थान पर गंदगी का फैलना, मार्ग का जर्जर होने का कारण प्रशासन की उदासीनता या स्थानीय जनता की लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना हरकते होती है, आज इसी बिषय पर यह लेख हरहर शम्भू चौधरी की कलम से।

बस्ती तेरी यही कहानी कूड़ा  कचरा और गंदा पानी 

हर हर शम्भू चौधरी (मुख्य संपादक) 

कोई भी शहर, गाँव या बस्ती अपने स्थापना दिवस से ही मलिन, गंदा या जर्जर नही होती। 

किसी भी अंचल को खास या महत्वहीन बनाने में स्थानीय निवासियो का बहूत बड़ा योगदान होता है। बस्ती को सुविधा सम्पन्न या स्वच्छ बनाना केवल जन प्रतिनिधि या प्रशासन की जिम्मेदारी नही है। इसकी जिम्मेदारी स्थानीय नागरीको को समझने की जरूरत है। 
जन प्रतिनिधी प्रशासन को बस्ती की समस्याओं से अवगत कर सकते है।बस्ती की उन्नति के लिए योजना की मांग कर सकते है। और प्रशासन बस्तीवालों के लिए योजना लागू कर सकता है। लेकिन उन योजनाओं का सुचारु रूप से चलते रहना स्थानीय लोगों की जिम्मेदारी बनती है।

उदाहरण के लिए बस्ती अंचलो में प्राशासनिक या जन प्रतिनिधियों के कोष से दिया जानेवाला सामुदायिक भवन को लेते है। 
सामुदायिक भवन का उपयोग स्थानीय लोग शादी व्याह,समाजिक बैठक व अन्य सामाजिक कार्यो के लिए करते है। इसलिए इस भवन की देखरेख, रखरखाव की जिम्मेदारी बस्तीवालो की बनती है। यदि भवन को किसी भी तरह से नुकसान पहुँचाया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी स्थानीय लोगों की ही बनती है इसके लिए प्रशासन के किसी भी कर्मचारी या जनप्रतिनिधी को दोष देना उचित नही है। यही बात नल, नाली, नाले, सड़क पर भी लागू होती है। 
नालियों की समय से सफाई न करना, सड़क पर पानी फेकना, पानी वितरण के लिए लगाई गई पाईप को नुकसान पहुँचाना, बिजली के खंभो और तारों से छेड़छाड़ करना और इनमें खराबी आनेपर जनप्रतिनिधीयो या संबंधित अधिकारियों को बुरा भला कहना, प्रशासन पर दोषारोपण करना किसी भी दृष्टि से उचित नही ठहराया जा सकता।

सरकारे या गैर सरकारी संस्थाएं जब जनता के हित में उनकी सुविधा के लिए किसी योजना को लागू करते है तो उस योजना को सुचारू रूप से चलते रहने देना, उसकी हिफाजत करना जनता के हाथ में है। 
किसी भी बस्ती, शहर, कालोनी में गंदगी पसरने का प्रमुख कारण कूड़ादान में कूडा़ ना डालकर कचरे को यहाँ वहाँ फेकना,कुडादान का नियमित सफाई ना करना, नालीयों की समय से सफाई ना करना, अपने आसपास के पेड़पौधो की सही देखभाल ना करना,पानी के पाईप को तोड़ना आदि बनता है। 
उल्लिखित समस्याएं स्थानीय जनता की लापरवाही से पनपती है इसलिए इन समस्याओं का सामाधान भी उनके हाथ में है।इस समस्याओं को मुद्दा बनाकर धरना प्रदर्शन करना, जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारीयो पर दोषारोपण करना कहाँ तक उचित है?